श्री हनुमान जी

ऊं हं हनुमते नम:।
हनुमान जी अपने भक्तों को दिव्य ज्ञान प्रदान कर रहे है। कलयुग के मानव जीव जो अपनी राह से भटक गए है हनुमान जी स्वयं उनका मार्गदर्शन करेंगे और उनके जीवन के उद्देश्य से परिचित करायेंगे। हनुमान जी द्वारा आप अपने अतीत और भविष्य के सभी दृश्य देख सकेंगे और उन दृश्यों का अनुभव भी कर सकेंगे। हनुमान जी आपकी अंतरात्मा की शुद्धि करके उसको दिव्य बनाने में आपकी सहायता करेंगे। पृथ्वी पर 7 ऐसी जगह है जहाँ हनुमान जी मानव जन-जाति के लोगो को दिव्य ज्ञान प्रदान कर रहे है परन्तु इन 7 जगहों में से एक जगह का नाम सामान्य लोगो के सामने आ चूका है। यह आवश्यक नहीं है कि हनुमान जी सिर्फ इन्ही सात जगह के माध्यम लोगो का मार्गदर्शन करते हो। हनुमान जी अनेको माध्यम से किरदारों का मार्गदर्शन करते है और यह भी एक माध्यम है जहाँ से हनुमान जी सभी किरदारों का मार्दर्शन करेंगे।

  • हनुमान जी से आप अपने जीवन की हर एक समस्या का समाधान पा सकते है।
  • हनुमान जी आपके किरदार की आत्मा को जाग्रत करने में आपकी सहायता करेंगे।
  • हनुमान जी को सच्चे मन से याद करने पर हनुमान जी आपको स्वयं दर्शन देंगे।

हनुमान जी कलयुग के अवतार

"चिरंजीवी हनुमान युगो-युगो से सभी जन के लिए मार्गदर्शन कर रहे है भटके हुए को राह दिखा रहे है।"Hanumaan

 जैसा कि आप जानते है हनुमान जी को अष्ट सिद्धियाँ प्राप्त है और उनके भीतर एक ज्ञान का सागर है। हनुमान जी उसी ज्ञान से आपको परिचित कराएँगे। हनुमान जी किसी एक समुदाय के लोगो को नहीं बल्कि सभी जन-जाति के लोगो को दिव्य ज्ञान प्रदान करेंगे। हनुमान जी आपके जीवन के सभी दृश्य जो अतीत, वर्तमान और भविष्य में है उनके परिचित कराएँगे।

हनुमान जी को जो अष्ट सिद्धियाँ प्राप्त है वो ये है:
1. अणिमा : अष्ट सिद्धियों में सबसे पहली सिद्धि अणिमा हैं, जिसका अर्थ! अपने देह को एक अणु के समान सूक्ष्म करने की शक्ति से हैं।जिस प्रकार हम अपने नग्न आंखों से एक अणु को नहीं देख सकते, उसी तरह अणिमा सिद्धि प्राप्त करने के पश्चात दुसरा कोई व्यक्ति सिद्धि प्राप्त करने वाले को नहीं देख सकता हैं। साधक जब चाहे एक अणु के बराबर का सूक्ष्म देह धारण करने में सक्षम होता हैं।
2. महिमा : अणिमा के ठीक विपरीत प्रकार की सिद्धि हैं महिमा, साधक जब चाहे अपने शरीर को असीमित विशालता करने में सक्षम होता हैं, वह अपने शरीर को किसी भी सीमा तक फैला सकता हैं।
3. गरिमा : इस सिद्धि को प्राप्त करने के पश्चात साधक अपने शरीर के भार को असीमित तरीके से बढ़ा सकता हैं। साधक का आकार तो सीमित ही रहता हैं, परन्तु उसके शरीर का भार इतना बढ़ जाता हैं कि उसे कोई शक्ति हिला नहीं सकती हैं।
4. लघिमा : साधक का शरीर इतना हल्का हो सकता है कि वह पवन से भी तेज गति से उड़ सकता हैं। उसके शरीर का भार ना के बराबर हो जाता हैं।
5. प्राप्ति : साधक बिना किसी रोक-टोक के किसी भी स्थान पर, कहीं भी जा सकता हैं। अपनी इच्छानुसार अन्य मनुष्यों के सनमुख अदृश्य होकर, साधक जहाँ जाना चाहें वही जा सकता हैं तथा उसे कोई देख नहीं सकता हैं।
6. प्रकाम्य : साधक किसी के मन की बात को बहुत सरलता से समझ सकता हैं, फिर सामने वाला व्यक्ति अपने मन की बात की अभिव्यक्ति करें या नहीं।
7. ईशत्व : यह भगवान की उपाधि हैं, यह सिद्धि प्राप्त करने से पश्चात साधक स्वयं ईश्वर स्वरूप हो जाता हैं, वह दुनिया पर अपना आधिपत्य स्थापित कर सकता हैं।
8. वशित्व : वशित्व प्राप्त करने के पश्चात साधक किसी भी व्यक्ति को अपना दास बनाकर रख सकता हैं। वह जिसे चाहें अपने वश में कर सकता हैं या किसी की भी पराजय का कारण बन सकता हैं।

हनुमान जी एक ही समय में भिन्न-भिन्न स्थान पर होकर अपने भक्तों को ज्ञान दे रहे है। अभी पृथ्वी पर 7 ऐसी जगह है जहां हनुमान जी स्वयं दर्शन देकर ज्ञान प्रदान करते है उन सात जगहों में से एक मातंग समाज के लोग है जो श्री लंका के एक जंगल में रहते है। ऐसे ही अन्य 6 स्थान है। Hanumaan,Hanuman

अष्ट सिद्धि और नव निधि

product हनुमान चालीसा की ये पंक्तियां यह बताती हैं कि सीता माता की कृपा से पवनपुत्र हनुमान, अपने भक्तों को अष्ट सिद्धि और नव निधि प्रदान करते हैं। जो भी प्राणी उनकी सच्चे मन और श्रद्धा के साथ आराधना करता है, हनुमान उसे अलौकिक सिद्धियां प्रदान करके कृतार्थ करते हैं।

हनुमानजी को अष्ट सिद्धियां और नव निधियां सूर्यदेव से प्राप्त हुई थीं। हनुमानजी के पास आठ प्रकार की सिद्धियां है। इनके प्रभाव से वे किसी भी व्यक्ति का रूप धारण कर सकते है। अत्यंत सूक्ष्म से लेकर अति विशालकाय देह धारण कर सकते है। जहां चाहे वहां मन की शक्ति से पल भर में पहुंच सकते है।

ये हैं नव निधियां
1. पद्म निधि : इस निधि से सात्विकता के गुणों का विकास होता है। ऐसा व्यक्ति स्वर्ण, चांदी आदि का दान करता है।
2. महापद्म निधि : धार्मिक भावनाएं प्रबल होती है। दान करने की क्षमता आती है।
3. नील निधि : नील निधि होने से व्यक्ति सात्विक रहता है और उसके पास कभी धन की कमी नहीं होती। तीन पीढ़ियों तक संपत्ति बनी रहती है।
4. मुकुंद निधि : इससे रजोगुणों का विकास होता है। राज्य संग्रह में व्यक्ति लगा रहता है।
5. नंद निधि : जिसके पास नंद निधि हो उसमें राजस और तामस गुणों की अधिकता होती है।
6. मकर निधि : जिसके पास मकर निधि हो वह विशाल शस्त्रों का संग्रह करता है।
7. कच्छप निधि : जिसके पास कच्छप निधि हो वह अपनी संपत्ति का सुखपूर्वक भोग करता है।
8. शंख निधि : यह निधि एक पीढ़ी के लिए होती है। यह निधि हो तो अतुलनीय संपत्ति का मालिक होता है।
9. खर्व निधि : खर्व निधि जिसके पास हो, वह विरोधियों और शत्रुओं पर विजय हासिल करता है।

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श्री हनुमान जी आपकी जीवन यात्रा में आपका मार्गदर्शन करेंगे।