जीवन में हर एक किरदार अपने आप में खुश रहने की इच्छा रखता है और खुद को खुश रखने के लिए किरदार अनेको कर्म करता है। परन्तु किरदार को कर्म के प्रभाव का ज्ञान ना होने की वजह से जीवन में दुखो का भी सामना करना पड़ता है जिससे किरदार की कायाओं को कष्ट होता है। किरदार का सम्पूर्ण जीवन कर्म और इच्छा पर निर्धारित होता है और किरदार अपने कर्म और इच्छा के अनुसार ही जीवन जीता है। जिस किरदार की आत्मा सुप्त होती है उस किरदार की खुद की कोई इच्छा नहीं होती है अन्य किरदार के कर्म और इच्छा अनुसार ही अपनी इच्छा जन्म देता है और उसी के अनुसार कर्म करता है जिसमे सुर-असुर शक्तियों का समावेश हो जाता है और किरदार का खुद पर नियंत्रण नहीं रहता और सुर-असुरो के अनुसार कर्म करता है और जीवन में सुख-दुःख के जाल में फसा रहता है जिसके कारण किरदार अपने जीवन की उद्देश्य को पूर्ण करने में असमर्थ रहता है और बाहरी दुनिया के भ्रम जाल में फसा रहता है। किरदार को अपने जीवन को सही ढंग से जीने के लिए अपनी आत्मा को जाग्रत करना अति आवश्यक है तभी किरदार अपने हर एक कर्म और इच्छा से और उनके प्रभाव से परिचित हो पायेगा और अपना जीवन बिना किसी समस्या के आनंदपूर्वक व्यतीत कर सकेगा। जीवन को सही ढंग से जीने के लिए परमात्मा द्वारा जन्मित तीन देवो में से एक ब्रह्मा के एक पुत्र महर्षि गौतम के आशीर्वाद से कलयुग के अवतार श्री हनुमान जी की उपस्थिति में देव पुत्र पवन कुमार द्वारा कलयुग ग्रन्थ की रचना की जा रही है जिससे मानव जनजाति का मार्गदर्शन होगा।