समय के तार

समय के दो तार होते है जिसमे से एक तार है इच्छा और दूसरा तार है कर्म।

इच्छा और कर्म समय के ये दो तार है एक साथ समान्तर पथ का निर्माण करते है जिनके साथ आत्मा किरदार के साथ यात्रा करती है और समय के पथ पर जो दृश्य मौजूद होते है उनका अनुभव करते है। आपकी आत्मा किस दृश्य में प्रवेश करती है ये आपकी इच्छा और कर्म पर निर्धारित करता है। समय के ये दो तार किरदार की आत्मा को अतीत, वर्तमान और भविष्य के सभी दृश्यों का अनुभव करा सकते है। जब आत्मा किरदार में रहती है तब वह बहुत-सी इच्छाओ को जाग्रत कर देती है क्योकि जिस दृश्य में किरदार अनुभव कर रहा होता है वहां अन्य किरदार भी मौजूद होते है उनमे से कुछ किरदार माया के जाल फसे होते है तो कुछ सुर और असुरो से प्रभावित हुए होते है। जब आत्मा किरदार में होती है तब आपका किरदार अन्य किरदारों से प्रभावित होने की सम्भावनाये ज्यादा रखता है क्योकि आत्मा शुन्य से बाहर निकलकर किरदार आ जाती है और सुप्त हो जाती है। सुप्त आत्मा का माया के जाल में फसना और सुर-असुरो से प्रभावित होना बहुत सरल हो जाता है और फिर आत्मा जो कि किरदार से जुडी हुई है वह माया जाल अनुसार कर्म करने लगती है और कर्म अनुसार दृश्यों का अनुभव करती है। समय के तारो से अनगिनत पथ बने हुए है जिसमे अनगिनत दृश्य है परन्तु माया उन सब दृश्यों के अनुभव आत्मा के पथ में बाधा डालती रहती है माया किरदार के मन को मोहित करती है और आत्मा को अपने जाल में फसाये रखती है। Hanuman Mantra